मारवाह स्टूडियो के तीस वर्ष पूरे



कड़ी मेहनत से बंजर भूमि भी उपजाऊ बन सकती है 

अवॉर्ड का खज़ाना है-संदीप मारवाह 

10 मार्च 1991, कल की ही बात लगती है जब हम सब उत्तर भारत के पहले फिल्म स्टूडियो, मारवाह स्टूडियो का भव्य उद्घाटन कर रहे थे और एक नया इतिहास लिखने के लिए उत्सुक थे, यह कहना था मारवाह स्टूडियो के संस्थापक डॉ. संदीप मारवाह का, मारवाह स्टूडियो के तीस वर्ष पूरे होने के अवसर पर। कृष्णा राज कपूर, शम्मी कपूर, सुरिंदर कपूर, बोनी कपूर, अनिल कपूर, संजय कपूर, यश चोपड़ा, एफ.सी. मेहरा, प्रेम चोपड़ा, विनोद पांडे, इंद्र कुमार, अशोक ठाकरिया, गुलशन कुमार, राकेश रोशन, टूटू शर्मा, राकेश नाथ ने मारवाह स्टूडियो में समारोह का उद्घाटन किया था और माधुरी दीक्षित, शिल्पा शिरोडकर, पद्मिनी कोलापुर, पूनम ढिल्लों, बीना ने अपने ग्लैमर से सबका दिल जीत लिया था, दूरदर्शन के लिए शुरू किए गए नए धारावाहिक खली हाथ को लॉन्च करना उन 2000 लोगों के लिए एक और बड़ा आकर्षण था जो तस्वीरों को क्लिक करने और अपने सबसे प्यारे सितारों से ऑटोग्राफ लेने में व्यस्त थे।
“मारवाह स्टूडियो ने एक लंबा सफर तय किया है, जिसमे हमारे माता-पिता का आशीर्वाद हमारे साथ रहा। तीस साल में हमने दुनियाँ को साबित कर दिया है कि ईमानदारी और कड़ी मेहनत से आप एक बंजर भूमि को उपजाऊ बना सकते है और जरूरी परिणाम पा सकते है। सात विश्व रिकॉर्ड, सौ संगठन, दो मिलियन लोग, 145 देश, 700 पुरस्कार, 20,000 मीडिया विशेषज्ञ, 60 राजदूत और कई कला और सांस्कृतिक संगठनों से ग्लोबल कल्चरल मिनिस्टर जैसे खिताब ने हमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों का गठन करने के लिए प्रेरित किया
मारवाह स्टूडियो के योगदान को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। समाज के कई अन्य वर्गों जैसे शिक्षा, पर्यावरण, बड़े सामाजिक मुद्दे, सरकारी अभियान में उनका योगदान सराहनीय है। 
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