स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव-2020: विज्ञान और समाज के अंतर को दूर करने की एक कोशिश

 


इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2020 के तहत स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव-2020 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 23-24 दिसंबर, 2020 को वर्चवल आयोजित हुए इस कॉन्लेवक का उद्देश्य नीति निर्माताओं, छात्रों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में प्रख्यात विशेषज्ञों के बीच बातचीत के लिए एक मंच प्रदान करना था। स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया। कार्यक्रम का समापन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के संबोधन के साथ हुआ।

इस वर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव का विषय एक खुशहाल, स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान था। दो दिवसीय कॉन्क्लेव के दौरान विशेषज्ञों ने उभरते और संक्रमण फैलाने वाले विषयों पर अपने सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कोविड-19 के लिए टीके, समग्र स्वास्थ्य, स्वस्थ भारत-फिट भारत जैसे विषयों पर भी चर्चा की। कॉन्क्लेव में शामिल विशेषज्ञों ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के तहत नई प्रौद्योगिकियों जैसे एआई और मशीन लर्निंग को स्वास्थ्य से सबंधित क्षेत्रों में शामिल करने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि स्वास्थ्य अनुसंधान की भूमिका ने उन चुनौतियों का सामना करने में प्रमुखता प्राप्त की है, जिससे देश वर्तमान में सामना कर रहा है। इस प्रकार के अनुसंधानों से भविष्य की चुनौतियों का भी सामना करने के लिए मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव में युवा वैज्ञानिक और छात्रों ने स्वास्थ्य अनुसंधान विशेषज्ञों से चर्चा कर लाभ उठाया। कॉन्क्लेव के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए श्री चौब ने आईसीएमआर को बधाई दी। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि विज्ञान के महत्व के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महामारी में अपने असाधारण प्रयासों के कारण आईसीएमआर एक घरेलू नाम बन गया है।

स्वास्थ्य अनुसंधान कॉन्क्लेव में देश और विदेश के पीएचडी, शोधकर्ताओं और स्कूल के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया

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